अलंकार
Class 7 Hindi · Poetics · 33 questions with answers
अलंकार बच्चों को कठिन इसलिए लगता है क्योंकि परिभाषाएँ रटाई जाती हैं। असल में तीन सबसे बड़े अलंकारों की पहचान एक-एक शब्द से हो जाती है: उपमा में 'सा, जैसा, समान' रहता है, उत्प्रेक्षा में 'मानो, जनु', और रूपक में इनमें से कुछ भी नहीं - वहाँ एक वस्तु दूसरी कह ही दी जाती है।
- उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा में वाचक शब्द देखकर अंतर करता है
- अनुप्रास को वर्ण की आवृत्ति से पहचानता है
- यमक और श्लेष का अंतर बता पाता है
- पंक्ति में अलंकार पहचानकर कारण लिख पाता है
Exercise 1 of 3 · 11 questions
उपमा, रूपक या उत्प्रेक्षा? वाचक शब्द भी लिखिए, यदि हो।
Write the answer · Warm-up
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'मुख चंद्रमा के समान सुंदर है' में उपमा है, और पहचान का आधार केवल एक शब्द है - 'के समान'। तीनों का भेद इसी पर टिका है। 'सा, जैसा, समान' दिखे तो उपमा; 'मानो, जनु' दिखे तो उत्प्रेक्षा; कुछ न दिखे और फिर भी एक वस्तु दूसरी कही जा रही हो तो रूपक। परिभाषा बाद में; पहले वाचक शब्द ढूँढ़िए।
- 1)मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।
- 2)चरण-कमल बंदौ हरि राई।
- 3)मुख मानो चंद्रमा है।
- 4)पीपल के पत्ते हरे मखमल-से हैं।
- 5)वह तो हमारे घर का दीपक है।
- 6)उसकी आँखें कमल के समान हैं।
- 7)वह मानो कोई देवदूत हो।
- 8)बालक सिंह-सा निर्भय है।
- 9)जीवन एक संघर्ष है।
- 10)उसका चेहरा ज्यों सूरज हो।
- 11)मन मंदिर है।
Answers
- 1) उपमा - वाचक शब्द 'के समान'।
- 2) रूपक - कोई वाचक शब्द नहीं; चरणों को कमल कह ही दिया गया है।
- 3) उत्प्रेक्षा - वाचक शब्द 'मानो'।
- 4) उपमा - वाचक शब्द 'से'।
- 5) रूपक - कोई वाचक शब्द नहीं; उसे दीपक कहा ही गया है।
- 6) उपमा - वाचक शब्द 'के समान'।
- 7) उत्प्रेक्षा - वाचक शब्द 'मानो'; संभावना व्यक्त हुई है।
- 8) उपमा - वाचक शब्द 'सा'।
- 9) रूपक - जीवन को संघर्ष कहा ही गया है, कोई वाचक शब्द नहीं।
- 10) उत्प्रेक्षा - वाचक शब्द 'ज्यों'; संभावना व्यक्त हुई है।
- 11) रूपक - मन को मंदिर कहा ही गया है।
Exercise 2 of 3 · 10 questions
अलंकार पहचानिए और कारण एक पंक्ति में लिखिए।
Write the answer · Guided
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यमक और श्लेष का अंतर एक ही बात पर है, और यही परीक्षा में पूछा जाता है। यमक में शब्द दो बार आता है और हर बार अर्थ अलग होता है - 'कनक कनक'। श्लेष में शब्द एक ही बार आता है और उसी एक शब्द के कई अर्थ निकलते हैं - 'पानी'। गिन लीजिए कि शब्द कितनी बार आया है; उत्तर वहीं मिल जाएगा।
- 1)तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए।
- 2)चारु चंद्र की चंचल किरणें।
- 3)कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय।
- 4)रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
- 5)मधुर मधुर मेरे दीपक जल।
- 6)बरसत बारिद बूँद बिहाई।
- 7)सरस सुधा-सी सरसुति सोहै।
- 8)कालिंदी कूल कदंब की डारन।
- 9)जो रहीम गति दीप की, कुल कपूत गति सोय।
- 10)सजि सुंदर सुख साज सुहावन।
Answers
- 1) अनुप्रास - 'त' वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है।
- 2) अनुप्रास - 'च' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 3) यमक - 'कनक' शब्द दो बार आया है, एक बार सोने के अर्थ में और एक बार धतूरे के अर्थ में।
- 4) श्लेष - 'पानी' शब्द एक ही बार आया है पर उसके कई अर्थ निकलते हैं: जल, चमक और इज़्ज़त।
- 5) अनुप्रास - 'म' वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है।
- 6) अनुप्रास - 'ब' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 7) अनुप्रास - 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 8) अनुप्रास - 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 9) यमक - 'गति' शब्द दो बार आया है और दोनों बार अर्थ अलग है।
- 10) अनुप्रास - 'स' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
Exercise 3 of 3 · 12 questions
अलंकार पहचानिए। सभी छह प्रकार मिले-जुले हैं।
Write the answer · Practice
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'काली घटा का घमंड घटा' में यमक है क्योंकि 'घटा' दो बार आया है और दोनों बार अर्थ अलग है - पहले बादल, फिर कम होना। ध्यान दीजिए कि इसी पंक्ति में 'घ' की आवृत्ति भी है, इसलिए अनुप्रास भी कहा जा सकता है। एक ही पंक्ति में दो अलंकार हो सकते हैं, और उत्तर में कारण लिखा हो तो दोनों में से कोई भी स्वीकार होता है।
- 1)हरि पद कोमल कमल-से।
- 2)बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
- 3)नील गगन-सा शांत हृदय।
- 4)उसका हृदय पत्थर है।
- 5)सोहत ओढ़े पीत पट, मनहुँ नीलमणि सैल।
- 6)काली घटा का घमंड घटा।
- 7)चरण कमल बंदौं हरि राई।
- 8)मुख मानो पूर्ण चंद्र है।
- 9)सिर पर बैठ्यो काग, आँख दोउ खात निकारत।
- 10)मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।
- 11)चंचल चपला चमक रही है।
- 12)उसका मन सागर है।
Answers
- 1) उपमा - वाचक शब्द 'से' है, और चरणों की तुलना कमल से की गई है।
- 2) अनुप्रास - 'प' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 3) उपमा - वाचक शब्द 'सा'।
- 4) रूपक - कोई वाचक शब्द नहीं; हृदय को पत्थर कह ही दिया गया है।
- 5) उत्प्रेक्षा - वाचक शब्द 'मनहुँ', अर्थात् मानो।
- 6) यमक - 'घटा' शब्द दो बार आया है, पहले बादल के अर्थ में और फिर कम होने के अर्थ में।
- 7) रूपक - चरणों को कमल कहा ही गया है, कोई वाचक शब्द नहीं।
- 8) उत्प्रेक्षा - वाचक शब्द 'मानो'।
- 9) अनुप्रास - 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 10) मानवीकरण - बादलों को मनुष्य की तरह सज-धज कर आते दिखाया गया है।
- 11) अनुप्रास - 'च' वर्ण की आवृत्ति हुई है।
- 12) रूपक - मन को सागर कहा ही गया है।
While your child works
- पहले वाचक शब्द ढूँढ़िए, परिभाषा बाद में। 'सा/जैसा/समान' - उपमा। 'मानो/जनु' - उत्प्रेक्षा। कुछ नहीं - रूपक।
- यमक या श्लेष? गिनिए कि शब्द कितनी बार आया है। दो बार तो यमक, एक बार तो श्लेष।
- उत्तर में कारण लिखवाइए। केवल नाम लिखने पर आधे अंक ही मिलते हैं।